पिछले कुछ सालों में प्राइवेट बैंकों ने शानदार कारोबारी प्रदर्शन किया है, हालांकि आर्थिक रफ्तार के सुस्त पडऩे से अब उन पर भी असर पड़ रहा है
निजी बैंक अच्छी रफ्तार से बढ़ रहे थे, लेकिन आर्थिक रफ्तार में आई सुस्ती ने उनकी बैलेंस शीट पर असर डालना शुरू कर दिया है। पिछले हफ्ते जिन बैंकों के नतीजे आए, वह इस बात की गवाही दे रहे हैं। एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और यस बैंक ने मार्च 2009 तिमाही के परिणाम घोषित किए हैं। इन बैंकों के मार्च तिमाही के परिणाम उनके पिछले नौ महीनों के प्रदर्शन के मुताबिक नहीं हैं। मार्च तिमाही में साल-दर-साल आधार पर एचडीएफसी बैंक के मुनाफे में 33.9 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि दिसंबर 2008 तक के नौ महीनों में यह 44.2 फीसदी रही थी। यस बैंक के लिए तो यह गिरावट और ज्यादा है। मार्च तिमाही में बैंक का मुनाफा घटकर 24.2 फीसदी रह गया जबकि दिसंबर 2008 तक के नौ महीनों में यह 65.1 फीसदी था।
एक्सिस बैंक ने आर्थिक सुस्ती का बेहतर तरीके से मुकाबला किया है। दूसरे साथियों के मुकाबले इसका प्रदर्शन बेहतर रहा है। वित्त वर्ष 2009 के पहले नौ महीनों में बैंक का मुनाफा 73.9 फीसदी की दर से बढ़ा था। मार्च 2009 तिमाही में यह 60.9 फीसदी रहा यानी बैंक को बहुत अधिक नुकसान नहीं हुआ है। मुनाफे में कमी की वजह, गैर-खाद्य मदों में दिए जाने कर्ज की रफ्तार में आई कमी है। दिसंबर तक बैंक का गैर-खाद्य मदों में दिया जाने वाला कर्ज 24 फीसदी था जबकि मार्च 2009 में यह घटकर 17 फीसदी हो गया। एक्सिस बैंक के लोन खाते में होने वाली बढ़ोतरी धीमी पड़ गई है। 2008 के दिसंबर में इसकी रफ्तार 54.9 फीसदी थी जबकि मार्च 2009 में यह 36.7 फीसदी हो गई। वहीं यस बैंक के कर्ज में बढ़ोतरी हुई है। मार्च 2009 में यह 31.5 फीसदी की दर से बढ़ी जबकि दिसंबर तिमाही में यह 27.2 फीसदी की दर से बढ़ी थी।
मार्च तिमाही में एचडीएफसी बैंक के कर्ज बांटने की रफ्तार 58 फीसदी की दर से बढ़ी। इस दौरान अपेक्षाकृत छोटे बैंकों के लोन खातों पर बुरा असर पड़ा है। लेकिन एचडीएफसी बैंक के लोन खाते में हुई बढ़ोतरी असल तस्वीर पेश नहीं करते क्योंकि 1 अप्रैल 2008 से सेंचुरियन बैंक ऑफ पंजाब का एचडीएफसी बैंक में विलय हो गया। कर्ज बांटने की रफ्तार में आई कमी के बावजूद बैंक के मुनाफे में बढ़ोतरी हुई है। इसका कारण गैर-ब्याज आय में वृद्धि और लागत को तर्कसंगत बनाया जाना है।
साल-दर-साल आधार पर एचडीएफसी बैंक की गैर-ब्याज आय दोगुनी हो गई। एक्सिस बैंक के गैर-ब्याज आय में 51.9 फीसदी का इजाफा हुआ। दोनों बैंकों के फीस और कमीशन आय में 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसके कारण बैंकों की गैर-ब्याज आय में बढ़ोतरी हुई। हालांकि यस बैंक की गैर-ब्याज आय में 15.2 फीसदी की कमी आई है। आर्थिक सुस्ती के इस बुरे दौर में बैंक अपनी लागत को कम करने का उपाय कर रहे हैं। ऐसा करने से उन्हें फायदा भी हो रहा है। 2008 की दिसंबर तिमाही में एक्सिस बैंक की कामकाजी लागत 38.3 फीसदी थी जबकि मार्च 2009 में यह 11.7 फीसदी हो गई। ऐसे ही एचडीएफसी बैंक और यस बैंक ने अपनी लागत पर लगाम लगाई है।
ज्यादातर जानकारों का मानना है कि इन बैंकों के तिमाही नतीजे सकारात्मक हैं और बाजार की उम्मीदों के हिसाब से हैं। हालांकि देश भर के तमाम बैंक इन दिनों आर्थिक मंदी का सामना करने के लिए हर संभव नीतियां अपना रहे हैं। लेकिन इन सब के बावजूद उनके तिमाही नतीजे साफ बता रहे हैं कि उनका कारोबार धीमा हुआ है। बैंकों के कर्ज बांटने की रफ्तार में कमी आ रही है इसलिए आने वाले दिनों में उनके मुनाफे में बढ़ोतरी की दर कम रह सकती है।
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Tuesday, April 28, 2009
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